गुरुवार, 27 नवंबर 2014

हिंदी के कारण 4 साल लटकी रही ऑडिट रिपोर्ट

उत्तरप्रदेश के  पंचायती राज विभाग की ऑडिट रिपोर्ट प्रदेश सरकार चार साल तक सदन में पेश नहीं कर पाई। वर्ष 2010-11 की ऑडिट रिपोर्ट सरकार ने बुधवार को विधान परिषद में पेश की।
सरकार ने खुद माना है कि यह रिपोर्ट विलंब से पेश की गई लेकिन इसकी जो वजह बताई वह सदन में विपक्ष को गले नहीं उतरी। सरकार ने कहा है कि इसकी यथोचित प्रतियां हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि में प्राप्त करने में विलंब हुआ।
विधान परिषद में प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं की तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट और पंचायती राज एवं सहकारी समितियों का बजट ऑडिट पेश किया। मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां और पंचायतें उत्तर प्रदेश की इस रिपोर्ट को पेश करने के दौरान ही सरकार ने लिखित में माना है कि 2010-11 की यह रिपोर्ट विलंब के कारणों सहित पेश की जा रही है।
सदस्यों को इसके कारण भी लिखित तौर पर बताए गए। इसमें लिखा है कि हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि में उपलब्ध न होने के कारण विलंब हुआ। इस पर बीजेपी विधान परिषद दल के नेता ने सवाल उठाया कि क्या विभाग में पूरा काम अंग्रेजी में होता है?
विभाग में लोग हिंदी नहीं जानते और क्या कोई अनुवादक भी नहीं है। इस पर सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका और कहा गया कि कारणों सहित रिपोर्ट पेश कर दी गई है।

बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

शुभेच्छा

सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभेच्छा ।


(डॉ. राजेन्द्र कुमार गुप्ता)

सोमवार, 29 सितंबर 2014

भाषण की समाप्ति संस्कृत के श्लोक से

शनिवार को न्यू यॉर्क के सेंट्रल पार्क में नरेंद्र मोदी ने युवाओं में जोश भरने वाले भाषण से वहां मौजूद हजारों की तादाद वाली भीड़ का दिल जीत लिया। मोदी ने सेंट्रल पार्क में हुए ग्लोबल सिटिजन फेस्टिवल में हिस्सा लेते हुए स्पीच में से 7 मिनट अंग्रेजी में भाषण दिया। इसके बाद मोदी ने अपने भाषण का समाप्ति संस्कृत के श्लोक से की।
रंगारंग कार्यक्रम के दौरान फिल्म ऐक्टर ह्यू जैकमन ने उन्हें एक 'चाय बेचने वाले' से गुजरात के सीएम बनने और फिर देश के प्रधानमंत्री वाले व्यक्ति के तौर पर भीड़ से इंट्रोड्यूस करवाया। मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए टीवी, लैपटॉप, टैबलट और फोन पर उन्हें देखने वालों को भी नमस्ते कहा। मौजूद लोगों ने हाथ हिलाकर और जोरदार तालियां बजाकर मोदी का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि वे बंद कमरे की बजाय पार्क में खुले में युवाओं के बीच ज्यादा बढ़िया महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'क्योंकि आप लोग भविष्य हो। आप जो आज करोगे, उसी से आने वाला कल निर्धारित होगा।'

मोदी ने कहा, 'कुछ लोग विश्वास करते हैं कि दुनिया में बुजुर्गों के ज्ञान के जरिए बदलाव होता है। मैं सोचता हूं कि आदर्शवाद, प्रयोगों, ऊर्जा और युवाओं का कुछ कर दिखाने का जज्बा और बर्ताव ज्यादा ताकतवर होता है।'
उन्होंने यह भी कहा,'भारत के युवाओं से भी मुझे यही उम्मीद है कि वे राष्ट्र को बदलने में हाथ मिलाकर चलेंगे।' इस स्पीच के बाद उन्होंने इसका अंत संस्कृत के इस श्लोक से किया-
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति।।

बुधवार, 17 सितंबर 2014

हिंदी माता हाउस वाइफ बनकर रह गई

व्यक्ति जिस भाषा में दूसरो की मां-बहनों को याद करता है, वही उसकी मातृभाषा होती है। मातृभाषा की यह एक सहज स्वीकार्य परिभाषा हो सकती है। लेकिन, भारतवर्ष में परायों को याद करने के लिए पराई भाषा के इस्तेमाल का चलन लगातार बढ़ रहा है। अब गालियां भी अंग्रेजी में दी जाती हैं। इसलिए मातृभाषा की परिभाषा हमारे लिए कुछ बदल गई है। थोड़ी-बहुत असहमतियों के साथ यह माना जा सकता है कि जिस भाषा की आप सबसे ज्यादा मां-बहन कर सकें, वही आपकी मातृभाषा है। इस खांचे में फिट करके देखें तो हिंदी के मातृभाषा होने में कोई शक नहीं रह जाता।
देश आजाद हुआ तो हिंदी माता को सरकारी बाबुओं के हवाले कर दिया गया गया। बाबुओं ने कहामाई चिंता मत करो, अब हर जगह तुम्हारा ही राज होगा। तुम्हारा खयाल रखने के लिए हर सरकारी दफ्तर में एक अधिकारी रखा जाएगा, जिसका काम ब्लैक बोर्ड पर रोजाना तुम्हारे नाम का एक शब्द लिखना और हर साल 14 सितंबर को तुम्हारे सम्मान में एक कार्यक्रम आयोजित करना होगा। हिंदी अधिकारी तुम्हारे लिए यदा-कदा कवि सम्मेलन भी करवाएगा, जिसमें आनेवाले कवियों को शॉल और श्रीफल के साथ राह खर्च भी दिया जाएगा। देखना माई सरकारी प्रयास से कश्मीर से कन्याकुमारी तक किस तरह लोग तुम्हारी जय-जयकार करेंगे। हिंदी ने कहाअभी मेरी उम्र ही क्या है, मेरे माथे पर बिंदी लगाकर क्यों मुझे माई बनाते हो। मैं अपनी राह खुद चल सकती हूं। लेकिन बाबुओ ने कहा- माताजी ऐसा कैसे हो सकता है, आप अपनी राह चलेंगी तो हमारी नौकरी का क्या होगा। आपके नाम पर देश-विदेश में सम्मेलन कैसे होंगे। नेताओं और बाबुओं को फोकट में विदेश यात्रा के अवसर कैसे मिलेंगे और फिर हम आपकी सेवा ही तो कर रहे हैं।
लेकिन, हिंदी कहां ठहरने वाली थी! अपनी रफ्तार से चलने लगी। गुजरात और महाराष्ट्र पार करके जैसे ही दक्षिण की तरफ बढ़ी कि बवाल शुरू हो गया। हिंदी माता के सपूत मद्रास से लेकर मदुरै तक जगह-जगह पिटने लगे। साइन बोर्ड मिटाए जाने लगे। हिंदी के खिलाफ राजनीतिक स्लोगन बनाए जाने लगे। यह सब देखकर घबराए चाचा नेहरु ने अपने बाबुओं की खबर ली 'तुम लोगो से कहा था, हिंदी माता को इस तरह बेलगाम मत छोड़ो। हिंदी माता का तमिल अम्मा के इलाके में क्या काम? उन्हे पता नहीं कि वह इलाका कितना डेंजरस है। अगर उन्हें और उनके सपूतों को कुछ हो गया तो मैं पूरे देश को क्या जवाब दूंगा?'
चाचा नेहरू ने पूरे देश को समझाया कि ठीक है, हिंदी हमारी मां है। लेकिन अलग-अलग राज्यों में जितनी भी मौसियां हैं, वे भी मां समान हैं। मौसियों को हिंदी माता से कोई बैर नहीं। लेकिन मौसेरे भाइयों का मैं कुछ नहीं कर सकता। इसलिए सीधा रास्ता यही है कि हिंदी माता बाबुओं की निगरानी में आराम फरमाएं, अपने हार्टलैंड से निकलकर कहीं बाहर ना जाएं। चाचा नेहरू ने देश से यह भी कहा कि यह हर्गिज मत भूलो कि तुम्हारी एक पितृभाषा भी है। भारतीय समाज में बाप का दर्जा मां से बड़ा होता है। हमेशा मां का पल्लू पकड़े रहोगे तो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाओगे। मातृभाषा लोरी सुनने के लिए ही ठीक है, भारत में रहकर रोटी कमाना चाहते हो तो अंग्रेजी सीखो। पूरा देश चाचा की दिखाई राह पर चल पड़ा। नतीजा यह हुआ कि हर जगह अंग्रेजी वाले के बाप का राज कायम हो गया और हिंदी माता हाउस वाइफ बनकर रह गई।

सोमवार, 15 सितंबर 2014

मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस मनाया गया।

भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को 'हिंदी-दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर जहां मुंबई स्थित विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और मुंबई विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस मनाया गया। वहीं, बैंकों और अन्य गैर सरकारी संस्थानों में भी हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित हुए। इस अवसर विदेशियों ने भी हिंदी भाषा की गरिमा को समझते हुए विभिन्न दूतावासों में भारतीयों के साथ शनिवार को हिंदी भाषा में बातचीत करते हुए नजर आए।
सातांक्रुज-वकोला स्थित पब्लिक नाइट कॉलेज के प्रिसिंपल योगेश नारायण दूबे की ओर से परिसर में हिंदी दिवस सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था, जबकि ग्रांट रोड स्थित बीएम रुइया गर्ल्स कॉलेज में मंगलवार को सांस्कृतिक कार्यक्रम, वादविवाद और काव्य पाठ एवं प्रतियोगिता की जाएगी। घनश्याम दास सराफ कॉलेज में डॉ. अचला नागर की उपस्थिति में हिंदी सिनेमा से जुड़े कवियों के गीतों का गायन और योगदान की चर्चा की गई।
घाटकोपर स्थित झुनझुनवाला कॉलेज में भाषण और निबंध प्रतियोगिता, जबिक आर.एन. रुईया कॉलेज में निबंध, स्वरचित काव्य प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ था। गौरतलब है कि 14 सितंबर, 1949 के दिन संविधान में हिंदी को राजभाषा घोषित करने के उपलक्ष्य में हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़ा मनाया जाता है।
हिंदी दिवस के मौके पर शहर के कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में सभी कामकाज एवं पढ़ाई हिंदी में होने की बात विद्यालय प्रबंधन समिति ने कही है। कांदिवली स्थित सेंट लॉरेंस हाईस्कूल के प्रधानाचार्य शशिशेखर चौहान ने बताया कि हिंदी दिवस के मौके पर छात्रों के बीच होने वाली असेंबली बैठक में हिंदी को वरियता दी गई। छात्र-छात्राओं ने हिंदी में काव्य पाठ, काव्य लेखन किया और भाषण दिया। वहीं, अंधेरी स्थित हंसराज मोरारजी पब्लिक स्कूल के शिक्षक सह एसएससी समिति सदस्य उदय नरे ने बताया कि इस अवसर पर विद्यालयों में राष्ट्रभाषा हिंदी के बारे में बच्चों को जानकारी देते हुए हिंदी का महत्व समझाया गया। मालाड स्थिति लेडी फातिमा देवी इंग्लिश उच्च विद्यालय में वाद-विवाद एवं काव्य प्रतियोगिता का आयोजन होने की बात शिक्षक राजेश पंड्या ने कही।
मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में भी हिंदी की भूमिका एवं महत्व के बारे में परिर्चचा की गई। कुल मिलाकर हिंदी दिवस के मौके पर शैक्षणिक संस्थाएं 'हिंदीमय' नजर आया।

गुरुवार, 28 अगस्त 2014

हिंदी समेत देवनागरी लिपि वाली 8 भारतीय भाषाओं के लिए डोमेन नाम लॉन्च

भारत सरकार ने हिंदी समेत देवनागरी लिपि वाली 8 भारतीय भाषाओं के लिए डोमेन नाम लॉन्च कर दिया है। अब इंटरनेट पर कोई वेबसाइट अपना नाम देवनागरी लिपि में रखते हुए पीछे .com या .in जैसे डोमेन की जगह .भारत रख सकती है।
जैसे registry.in को वेब ब्राउज़र में रजिस्ट्री.भारत लिखकर भी खोला जा सकता है। अगर आप टाइप न कर सकते हों, तो ब्राउज़र में 'रजिस्ट्री.भारत' कॉपी-पेस्ट करके देख सकते हैं।
अब वेबसाइट के नाम देवनागरी लिपि का इस्तेमाल करने वाली भाषाओं हिंदी, बोडो, डोगरी, कोंकणी, मैथिली, मराठी, नेपाली और सिंधी में रखे जा सकते हैं।
नैशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) के सीईओ गोविंद
 पहले ही बता चुके हैं कि ऐसे हर डोमेन का चार्ज 350 रुपए होगा। सब-डोमेन 250 रुपए में मिलेगा। शुरू के दो महीने में यह उन कंपनियों के लिए होगा, जिनके पास कॉपीराइट या ट्रेड मार्क है। इसके बाद यह सभी के लिए उपलब्ध होगा। डोमेन नाम के पंजीकरण में लगी कंपनियां भी हिंदी स्क्रिप्ट वाले डोमेन नाम का पंजीकरण कर सकती हैं।
टेलिकॉम और आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, 'यह पहल केवल 8 भाषाओं पर नहीं रुक जाएगी। मैंने विभाग से कहा है कि .भारत डोमेन सभी भारतीय भाषाओं में जल्द उपलब्ध होना चाहिए।'
इसके लिए NIXI जल्द ही बांग्ला, उर्दू, पंजाबी, तेलुगू, तमिल और गुजराती के लिए डोमेन नाम जारी करेगी।
रवि शंकर प्रसाद ने बताया, 'हम इस साल 60,000 गांवों तक ब्रॉडबैंड पहुंचा देंगे। अगले साल एक लाख और उसके अगले साल भी एक लाख गांवों तक नैशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के जरिए ब्रॉडबैंड पहुंचा दिया जाएगा।' मार्च 2017 तक 2.5 लाख ग्राम पंचायतों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाया जाना है, जिसमें 35,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

बुधवार, 20 अगस्त 2014

हिंदी अदालती कामकाज की आधिकारिक भाषा

अंग्रेजी के बजाय हिंदी को अदालती कामकाज की आधिकारिक भाषा बनाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया कि मुकदमे हारने या जीतने वालों को अंग्रेजी में लिखे गए फैसले बमुश्किल ही समझ में आते हैं। जस्टिस एच एल दत्तू और जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच ने वकील शिवसागर तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। 
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अंग्रेजी ही आधिकारिक भाषा है। किसी भी राज्य के राज्यपाल अपने यहां के हाई कोर्ट में किसी अन्य भाषा के इस्तेमाल का आदेश दे सकते हैं। निचली अदालतों में हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं का खूब इस्तेमाल होता है।
 

याचिका में दावा किया गया कि स्वतंत्र भारत के शुरुआती 15 वर्षों के लिए ही अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने की बात की गई थी और उसके बाद हिंदी को यह दर्जा मिलना था, लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ भी नहीं किया गया है। याचिका में मांग की गई कि देश के सभी हाई कोर्टों और सुप्रीम कोर्ट में देवनागरी लिपि में हिंदी को अपनाया जाए। 
उत्तर प्रदेश निवासी 75 वर्षीय तिवारी ने संविधान के अनुच्छेद 349 का हवाला दिया, जिसके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है। तिवारी ने याचिका में कहा, 'इसके कारण वादियों को मजबूरन अंग्रेजी का इस्तेमाल करना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट में फैसले अंग्रेजी में सुनाए जाते हैं। विदेशी भाषा में सुनाए गए फैसले वादियों को समझ में नहीं आते हैं, भले ही वे कितने भी पढ़े-लिखे हों क्योंकि विदेशी भाषा की तासीर ही कुछ ऐसी है।'
 
उन्होंने दलील दी, 'इंसाफ का तकाजा यही है कि जो भी निर्णय हो, वह वादी की समझ में आना चाहिए। वादियों को तो दरअसल वकील लोग बताते हैं कि वे मुकदमा हार गए हैं या जीत गए हैं। अगर कोई फैसला देश की राष्ट्र भाषा में सुनाया जाए तो 90 प्रतिशत जनता उस फैसले को समझ सकेगी।'
 याचिका में यह भी कहा गया कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा दुनिया के किसी भी देश में अंग्रेजी अदालती कामकाज की भाषा नहीं है। याचिका में कहा गया कि अगर किसी को देश की आधिकारिक भाषा यानी हिंदी की अच्छी समझ न हो तो उसे न्यायिक सेवा में भी नहीं लिया जाना चाहिए। तिवारी ने कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को भी हिंदी में काम करना होता है, भले ही उनकी मातृभाषा दूसरी हो। सेना के अधिकारियों के लिए भी हिंदी ज्ञान अनिवार्य है।