गुरुवार, 30 जुलाई 2009

राजभाषा से संबंधित और डॉक्टर एक जगह ही पूरी नौकरी करना चाहते है

राजभाषा से संबंधित और डॉक्टर एक जगह ही पूरी नौकरी करना चाहते है इसीलिए आज तक हिन्दी राजभाषा नहीं बन पाई ।
हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर सरकारी कर्मचारी तबादले वाले पद पर हैं तो उन्हें इस बात का अधिकार नहीं है कि वह एक ही जगह पर नौकरी करते रहें। हाई कोर्ट ने कहा कि सर्विस कंडिशन के तहत तबादला होता है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने एक डॉक्टर की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

मंगलवार, 21 जुलाई 2009

सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया के चैन्ने आंचलिक कार्यालय में यूनीकोड पर कार्यशाला

सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया के चैन्ने आंचलिक कार्यालय में यूनीकोड पर कार्यशाला को आयोजन किया गया जिसमें प्रमुख्य रूप से हिन्दी कंपटिंग फाउण्डेशन के सचिव डा. राजेन्द्र कुमार गुप्ता को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया था ।
इस कार्यशाला में तमिलनाडू में इस बैंक के अधिकतकर आई टी अधिकारियों ने भाग लिया और कंप्यूटर में हिन्दी को सरल रूप से प्रयोग के अनेकानेक प्रयोग सीखे ।
यूनीकोड पर ई-मेल और ब्लॉग का प्रशिक्षण विशोष रूप से दिया गया जिसको सभी कर्मचा॑रियों और अधिकारियों के सराहा ।

शनिवार, 18 जुलाई 2009

मातृभाषा में शिक्षा देने के समर्थकों को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के रूप में बड़ा तरफदार मिल गया

बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने के समर्थकों को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के रूप में बड़ा तरफदार मिल गया है। बकौल हिलेरी, अमेरिका में भी इस मुद्दे पर बहस जारी है। हिलेरी जेवियर कॉलिज के स्टूडेंट्स के साथ खास इंटरएक्टिव सेशन में हिस्सा ले रही थीं। उनके साथ टीच इंडिया कैंपेन के ब्रैंड ऐंबैसडर आमिर खान और सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ के अरनब गोस्वामी भी थे। इस मौके पर हिलेरी आमिर की तारीफ करने से भी नहीं चूकीं। उन्होंने कहा, आमिर खान यहां हमारे साथ हैं, यह मेरे लिए खुशी की बात है। वह न केवल बॉलिवुड के आइकन हैं बल्कि शिक्षा के जबर्दस्त समर्थक भी हैं। हिलेरी ने कहा, मैं यहां यह देखने आई हूं कि अमेरिका और भारत किस तरह शिक्षा के साझा मुद्दे पर काम कर सकते हैं। शिक्षा सभी अंतरों को पाटकर नए अवसर मुहैया कराती है। शिक्षा हमेशा से मेरे दिल के बहुत नजदीक रही है। शिक्षा के माध्यम पर हिलेरी का कहना था, न्यू यॉर्क सिटी में प्रमुख स्कूल स्पैनिश, चाइनीज, रशियन भाषा के हैं। समाज का बड़ा हिस्सा कहता है कि बच्चों को उन्हीं की भाषा में पढ़ाया जाए। लेकिन दिक्कत यह है कि न्यू यॉर्क सिटी के स्कूलों में एक से अधिक भाषा जानने वाले टीचर ज्यादा नहीं हैं। आमिर का मानना था कि किसी भी बच्चे को उसी भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए जिसमें वह और उसका परिवार सुकून महसूस कर सके। इससे वह अपनी संस्कृति से जुड़ा रहेगा। अमेरिका में शिक्षा की चुनौतियों पर हिलेरी की कहना था, अमेरिका में शिक्षा पर काफी पैसा खर्च होता है लेकिन हम उन बच्चों के लिए कुछ नहीं करते जो पीछे रह जाते हैं। वहां बहुत ज्यादा असमानता है। भारत में तकनीकी शिक्षा दुनिया में सबसे बेहतरीन है। शिक्षा में अवसर के मुद्दे पर हमें मिलकर काम करना होगा। तारे जमीन पर में शिक्षा के व्यापक स्वरूप पर जोर देने वाले आमिर का कहना था, शिक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए। टीचरों को भी ऊंची सैलरी दी जानी चाहिए ताकि इस क्षेत्र में प्रतिभावान लोगों को खींचा जा सके। हिलेरी ने टीच इंडिया और टीच फॉर इंडिया अभियान की तारीफ करते हुए कहा, इससे ऐसा आंदोलन शुरू होगा जो भारत में शिक्षा क्षेत्र में मौजूद गैरबराबरी को खत्म करने के लिए एक पुल का काम करेगा।

गुरुवार, 9 जुलाई 2009

हास्य कवि ओम व्यास का बुधवार सुबह निधन हो गया।

पिछले महीने एक सड़क हादसे में घायल हुए हास्य कवि ओम व्यास का बुधवार सुबह निधन हो गया। उनका दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। उज्जैन के आईजी पवन जैन ने बताया कि व्यास सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। गौरतलब है कि आठ जून की सुबह विदिशा में आयोजित बेतवा महोत्सव में हिस्सा लेकर लौट रहे कवियों का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कवि ओम प्रकाश आदित्य, लाड सिंह और नीरज पुरी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि ओम व्यास गंभीर रूप से घायल हुए थे।

मंगलवार, 30 जून 2009

पश्चिम रेलवे के पूर्व मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री उत्तम चन्द जी आज सेवानिवृत्त

पश्चिम रेलवे के पूर्व मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री उत्तम चन्द जी आज सेवानिवृत्त हो रहे है । श्री उत्तम चन्द इस रेलवे में मुख्य प्रशासन अधिकारी (सर्वे व निर्माण के पद के सेवा निवृत्ति ले रहे है ।
राजभाषा परिवार की ओर से उनके भावी जीवन केलिए शभकामनाएं
उल्लेखनीय है कि श्री उत्तम चन्द जी को मुंबई की कई जानी मानी स्वये सेवी संस्थाओं ने 29 जून 2009 को सम्मानित किया इस मौके पर मध्य रेल के साहित्यकार लेखक और गतिशील व्यक्ति श्री सत्यप्रकाश, सी सी एम भी उपस्थित थे । डॉ. राजेन्द्र कुमार गुप्ता ने उन्हे सम्मान में सहायता की । श्री सत्य प्रकाश जी ने पुष्पगुच्छ दिया । आशीर्वाद के निदेशक डॉ. उमाकान्त बाजपेई ने श्रीफल शॉल, तथा श्रुति संवाद साहित्य कला अकेडमी के अध्यक्ष श्री अरविन्द शर्मा राही ने सम्मान पत्र प्रदान किया । सम्मान पत्र का वाचन श्री अनत श्रीमाली ने किया जिसकी सभी ने मुक्तकंण्ठ से प्रशंसा की ।

गुरुवार, 11 जून 2009

हमारी ओर से अश्रुपूर्ण श्रृद्धांजलि

भोपाल से लगभग 10 किलोमीटर दूर सूखी सेवनिया के नजदीक सोमवार तड़के एक सड़क दुर्घटना में तीन जाने-माने कवियों ओमप्रकाश आदित्य, लाड़सिंह गुर्जर तथा नीरज पुरी की मौत हो गई। दुर्घटना में दो अन्य कवियों सहित तीन लोग घायल हो गए। एसपी जयदीप प्रसाद ने को बताया कि सभी कवि रविवार रात राजधानी के निकट स्थित विदिशा में बेतवा उत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेकर लौट रहे थे। इसी दौरान सूखी सेवनिया के निकट संभवत: ड्राइवर को नींद आ गई और गाड़ी किसी अज्ञात वाहन से टकरा गई, जिससे ओमप्रकाश आदित्य और लाड़सिंह गुर्जर की मौके पर ही मृत्यु हो गई जबकि नीरज पुरी ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में जानी बैरागी एवं ओम व्यास नाम के कवियों सहित तीन लोग घायल हो गए। उन्हें भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तीन दिवसीय बेतवा महोत्सव का रविवार को अंतिम दिन था और इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन रात लगभग दस बजे शुरु हुआ जो सुबह साढे़ तीन बजे के आसपास समाप्त हुआ। ये सभी कवि एक इनोवा में सवार होकर सुबह चार बजे के लगभग भोपाल के लिये रवाना हुए। प्रसाद ने बताया कि कवियों की इनोवा के पीछे और दो वाहन भी आ रहे थे, जिन्होंने इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस सभी को तुरंत अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने ओमप्रकाश आदित्य, लाड़सिंह गुर्जर और नीरज पुरी को मृत घोषित कर दिया।

रविवार, 7 जून 2009

हिन्दी कर्मियों की सेवा संबंधी भर्ती नियमों में संशोधन की आवश्यकता है

टेलीविजन पर एक कार्यक्रम देख कर मन में शंका उत्पन्न होने लगी कि वाकई इस देश की भाषा क्या है । इस कार्यक्रम में हंस के संपादक श्री राजेन्द्र यादव का मानना था कि भाषा पर अब सरकार हावी है अतः इस समय देश में हिन्दी की बात करना वेमानी होगी । हालांकि यह बताया जा रहा था कि आज भी देश में हिन्दी अखबारों की सबसे ज्यादा बिक्री है । लोग हिन्दी के अखबार पढते है और सबसे ज्यादा लोग हिन्दी बोलते और समझते है । यहीं पर डॉ देवेन्द्र जी संस्कृत की हिमायत कर रहे थे उनका मानना था कि यदि सरकार १९४७ में ही संस्कृत को देश की राजभाषा बना देती तो आज कहीं भी विरोध नहीं होता और सारे देश में अपनी भाषा हो जाती । इसी क्रम में अन्य लोगो का मानना था कि हिन्दी में इंजीरिग की पुस्तकें भी उपलब्ध नहीं है तो यह किस आधार पर कहा जा सकता है कि हिन्दी देश की राजभाषा के रुप में स्वीकार्य है ।
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या वाकई देश की राजभाषा अब हिन्दी नहीं हो सकती, यदि नही हो सकती तो क्यों न इसे संविधान संशोधन करके देश की जनता के समक्ष किसी एक भाषा को निरूपित किया जाए । हमारा मानना है कि सरकारी ढुलमुल रवैये के कारण और मंत्रालयों में बैठे उन हिन्दी पंडितों के कारण , जिन्हे कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है, आज हिन्दी की यह दशा हो रहीं है । आज इस बात पर एक बहस की आवश्यकता है और हिन्दी कर्मियों की सेवा संबंधी भर्ती नियमों में संशोधन की आवश्यकता है जिससे यह भाषा देश की आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके ।