मंगलवार, 4 नवंबर 2008

बेलास्ट अनलोडिंग में दिया जा रहा अनावश्यक रेट

बेलास्ट अनलोडिंग में दिया जा रहा अनावश्यक रेट
हाजीपुर :- पूर्व मध्य रेल, यानि रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव की रेलवे, में जो न हो वह कम हैं। यहाँ खूब अन्धाधुन्धी चल रही हैं। यहाँ सबसे ज्यादा काम और फंड इंजीनियरिंग विभाग के पास हैं और इसी के साथ इसमें ही सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार भी हैं। परंतु रेल प्रशाशन यहाँ रेलमंत्री के डर से अपनी ड्यूटी और कर्तव्य निभाने वाले अधिकारियो की ही जड़ काट देता हैं। यही कारण है कि दीपटी सिवियो/इंजी, को बिना वजह यहाँ से हटा दिया गया था, जबकि सीवीसी और रेलवे बोर्ड द्वारा उनहे पुनः उसी पद पर पदस्थापित किए जाने के आदेश के बावजूद आज तक इस आदेश पर अमल नही किया गया। परिणामस्वरूप डिप्टी सिवियो/इंजी, कि पोस्ट पिछले करीब ६ महीनो से खाली पड़ी है और इस पोस्ट का काम डिप्टी सीवीओ/स्टोर को देखना पड़ रहा है। हटाये गए डिप्टी सीवीओ/इंजी, का दोष यह था कि उन्होंने लालू के करीबी बेलास्ट ठेकेदारों के बेलास्ट रेक और उसके मानक चेक करने कि गुस्ताखी कर डाली थी। इसी के साथ एसदीजीएमका भी ट्रान्सफर कर दिया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार यहाँ बाबिन बॉक्स से बेलास्ट उन्लोअद करने के लिए भी ठेकेदारों को ३८ रु, प्रति क्यूबिक मीटर का रेट दिया जा रहा है जो कि बीसीएन से मनुअल उनलोअडिंग में कम से कम ६ आदमी लगते है जो ४ से ६ घंटे में एक बीसीएन को खाली कर पाते है, जबकि बाबिन बॉक्स से चलते हुए (रनिंग में) बेलास्ट खाली होती है और इसमे २ घंटे में पुरा बाबिन रेक खाली हो जाता है। इसलिए बाबिन बॉक्स के लिए ९ से १३ रु, प्रति क्यूबिक मीटर का मनअनक रेक निर्धारित है। मगर पू, रे, में इसका उल्टा हो रहा है। यहाँ रेलवे को करोडो का चुना लगाने के अन्य कई प्रकारों में से यह भी एक प्रकार है। ज्ञातव्य है कि एक रेक में कम से कम १४ से १५ सौ क्यूबिक मीटर बेलास्ट कि लोअदिंग होती है और इस प्रकार प्रति रेक यहाँ ३०,००० से ३५,००० रु, का चुना रेलवे को लगाया जा रहा है। परंतु रेल प्रशाशन मंत्री के डर से इस भयंकर नुक्सान कि तरफ़ कोई ध्यान नही दे रहा है। इस प्रकार रेलवे को मंत्री के सभी सगे सम्बन्धी मिलकर बुरी तरह लूट रहे हैं। बताते है कि पूर्व सीई/कन्स्त्रुच्शन /हेडक्वार्टर ने भी बहती गंगा में खूब हाथ धोये है, जिन्हें तमाम शिकायतों के बाद हालही में हटाया गया है। इसके अलावा पू,रे, में पिदब्ल्युआइ' कि कोई भी सेक्शन पोस्ट नही है, जबकि यहाँ ऎसी २२ पोस्टें खाली है। यहाँ सिर्फ़ जेई-१ कि आठ सेक्शन पोस्टें हैं, जहा वर्तमान में ३८ लोग कार्यरत हैं, एसई में ४ लोग है जबकि ७ पोस्टों का सेक्शन नही दिया जा रहा है। इसी के साथ अन्य रेलों के आप्शन में यहाँ आऐ एसई/ जेई का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि नियम से सभी डिप्टी सीई के पास एक-एक पि-वे- स्टोर कि पोस्ट होनी चाहिए। ऐसी कम से कम १६ पोस्टों कि जरुरत है। मगर सिर्फ़ एक पोस्ट दी गई है। की ने बताया कि पोस्टें सेक्शन करने और देने के लिए भी यहाँ कार्मिक विभाग (ऐपीओ/कन्स्त्रुक्शन) द्वारा पैसे कि अपेक्षा कि जाती हैं। इसी प्रकार इंजी, ओपन लाइन में डिप्टी सीई के एवम कार्यालयों में दसियों साल से एक ही पोस्ट पर बैठे बाबू लोग खलासियों/ हेल्परों/ गंग्मैनों से उनके ट्रान्सफर एवम त्रवेल्लिंग अल्लौंस पास करने के लिए पैसे (कमीशन) लेते हैं। सूत्रों का कहना है की खलासियों से १२ प्रतिशत और पिदब्ल्युआइ/ आईओडबल्यू आदि से ४ से ६ प्रतिशत कमीशन (रिश्वत) की मांग बाबू लोगो द्बारा की है। उनका कहना था की इसी तरह तमाम अवार्ड भी डीआरएम्, पीएचओदी और जीएम् की चापलूसी करने वालों अथवा मंत्री के नजदीकी होने का दवा या धौस दिखाने वाले अकर्मण्य लोगो को दिए जाते हैं।
सूत्रों ने बताया की यहाँ इंजी, स्टोर दीपो आदि में १०-१५ वर्षों से लोग बैठे हुए हैं और यह इतने 'पावरफुल' हो गए है की इनके ट्रान्सफर का मामला आते ही पीएचओदी' के हाथ- पाव फूल जाते हैं क्योंकि इन्होने अपनी अपार अवैध कमाई के बल पर 'लालू कुटुंब' और स्थानीय माफिया के साथ अपने गहरे सम्बन्ध बना लिए हैं।
सूत्रों ने बताया की दरभंगा-समस्तीपुर के बीच अभी हालही में दीप्ती सीई/सी श्री तुसल्मुद्दीन को एक ब्रिज के गर्डर को रेप्लास करके नया गर्डर लगाने का काम सौंपा गया है, क्योंकि उनपर प्रशाशन और लालू काफ़ी मेहरबान हैं। एक तरफ़ तमाम अधिकारी, जो मुख्यालय छोड़कर पटना में रहते है, पटना से हाजीपुर आते है, जबकि सभी सीई हाजीपुर से पटना जाते हैं। यहाँ समस्त इंजी, मटेरिअल सप्लाई प्रबंध देखने का काम रेलमंत्री के चहेते दीप्ती सीई को दिया गया है, जबकि फिल्ड से लेकर सेंट्रल स्टोर, हाजीपुर तक भारी घफ्ला चल रहा है, जबकि यहाँ १० साल से ज्यादा समय से पदस्थ क्लेर्कों को हटाकर अन्यत्र लगाने की हिम्मत किसी में नही हो रही है.

इंजीनियरिंग बनाम ऑपरेटिंग

इंजीनियरिंग बनाम ऑपरेटिंग
"निष्कर्ष: कटरा से बानीहाल रेल लाइन विवाद"नयी दिल्ली :- जम्मू और कश्मीर को रेल laaiino से जोड़ने की केन्द्र सरकार की महत्वकांशी योजना को रेलवे की नौकरशाही विवाद में डालकर देश को अरबों के नुक्सान में डालने जा रही हैं। इस विवादग्रस्त और उद्रवादी गतिविधियों में आक्रांत राज्य के विकास के लिए हजारो करोड़ रु, झोंककर केन्द्र सरकार ने जम्मू क्षेत्र में कटरा ने बानिहाल के बीच १२५ किमी रेल लाइन के निर्माण की योजना बनाई थी। पिछले चार वर्षों में इस महत्वपूर्ण परीयोजना पर सैकडों करोड़ रु, खर्च हो चुके है। अब चेनाब नदी पर बनने वाले विश्वके सबसे उन्छे मेहराबदार रेल पूल सहित इस लाइन के ३४ किमी क्षेत्र का अलाइनमेंट बदल दिए जाने का विवाद पैदा करके भा, रे, के इंजीनियरिंग और ऑपरेटिंग विभाग आमने-सामने आ गए है।प्राप्त जानकारी के अनुसार इंजीनियरिंग विभाग के इस लाइन का ऐलाइनमेंट बदलकर इसे ज्यादा सरल बनाने की कोशिश के गई थी। इंजी, विभाग का मानना था की इससे इसकी प्रोजेक्ट कसते में काफ़ी कमी की जा सकती है तथा पहले के लंबे-चौडे चेनाब पूल की अपेक्षा नए ऐलाइनमेंट में यह पूल कम चौडी जगह पर बनने से ज्यादा सुरक्षित होगा। परन्तु पिछले चार साल से पुराने ऐलाइनमेंट पर काम होते हुए अब तक इस प्रोजेक्ट पर करीब २००० करोड़ रु, खर्च हो चुके है और इस विवाद के चलते जुलाई से सारा काम भी थाप पडा हुआ है।जबकि ऑपरेटिंग विभाग का मानना है की पुराने ऐलाइनमेंट के अनुसार ही इस प्रोजेक्ट पर काम होना चाहिए। इस सम्बन्ध में उ, रे, के महाप्रबंधक श्री प्रकाश ने २० सितम्बर को एक पत्र लिखकर बोर्ड से इस लाइन के पुराने ऐलाइनमेंट पर ही पुन्हाविचार करने को कहा था। श्री प्रकाश अब बोर्ड में एम्टी बन गए है और महाप्रबंधक/ उ, रे, का भी अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे है। श्री प्रकाश ने अपने दो पेजी पत्र में प्रमुख रूप से तीन बिन्दुओं पर बोर्ड का ध्यान आकर्षित करते हुएपुराने ऐलाइनमेंट पर ही इस योजना का काम पुनः शुरू करने की मांग की है। १) राजनीतिज्ञों के ज्ञापन और मीडिया की रिपोर्टों में पुराने ऐलाइनमेंट पर ही इस योजना का काम पुनः शुरू करने की मांग की है। २) रिव्यू मीटिंग में १० सितम्बर को जम्मू एवम कश्मीर के राज्यपाल श्री एन, एन, वोहरा ने भी चेनाब ब्रिज सहित जम्मू क्षेत्र के इस १२५ किमी, कटरा-बनिहाल रेल प्रोजेक्ट पर जुलाई से काम बाँध होने पर चिंता जाहीर की थी।३) यह मामला काफ़ी संवेदनशील है, क्योंकि चेनाब ब्रिज को शिफ्ट करने सहित कटरा-बनिहाल लाइन का ऐलाइनमेंट बदलने ऐ इसके निकटवर्ती गावों में भारी असंतोष फ़ैल सकता है।अपने क्षेत्र में श्री प्रकाश ने आगे कहा है की पुराने ऐलाइनमेंट में चेनाब नदी पर प्रोजेक्ट के सब-कांट्रेक्टर उल्त्र आफ्कांस विएसएल को भारी भरकम आर्क ब्रिज के निर्माण की नींव डालने के लिए जगह नही मिल पा रही है। हलाँकि इस मुद्दे पर श्री प्रकाश आगे चुप है और यही मुख्या कारण है की चेनाब ब्रिज सहित इस पुरी परियोजना के कटरा से शुरुकोट के बीच की ३४ किमी लाइन के सभी कान्त्रेक्ट्स को रोके देने (शोर्ट क्लोस्ज्द) का आदेश एम्ई श्री एस, के, विज ने दिया था। चूँकि यह पूरा प्रोजेक्ट भारत की कन्सालिदेतेद फंड से वित्त पोषित हो रहा है। इसलिए श्री प्रकाश उसी का वास्ता देते हुए श्री विज की बात को दरकिनार करते हुए अपने पत्र में कहता है की पुराने ऐलाइनमेंट में ३४ किमी रूट पर सुरंगे बनाने और अन्य कार्यो पर चेनाब ब्रिज के ३०० करोड़ सहित जो १००० करोड़ रु, खर्च हो चूहे है उसका क्या कोगा?श्री प्रकाश के करदाताओं की mehanat की कमाई के बेकार चले जाने क्र उपरोक्त सवाल पर श्री विज का कहना है की श्री प्रकाश उक्त बेकार खर्च को रोक सकते थे क्योंकि नया ऐलाइनमेंट आज नही काफ़ी पहले देदिया गया था। उन्होंने यह बात २६ सितम्बर को रिकॉर्ड भी की है। जहा तक री-ऐलाइनमेंट पर गांववालों की नाराजगी बढ़ने के श्री प्रकाश के दावे की बात है तो इसे भी सिरे से खारिज करते हुए श्री विज का कहना है की प्रोजेक्टेड के मोडीफाइड ऐलाइनमेंट से दूरदराज़ के रहिवासियों एवम गावों पर कोई प्रभाव नही पडेगा, क्योंकि इसके साथ ही कटरा-बनिहाल के बीच २५० किमी, लम्बी प्रमुख सड़क भी बनाई जा रही है।श्री प्रकाश के सारे तर्कों को दरकिनार करते हुए श्री विज ने कहा की पत्र लिखने और विवाद पैदा करने के बजाय मोडीफाइड ऐलाइनमेंट पर काम शुरू होने से पहले वह अपने सुझाव लेकर उनके पास आ सकते थे। ज्ञातव्य है की इस मामले में कोई अन्तिम निर्णय लेने और आदेश देने के लिए श्री विज फिनल अथॉरिटी है, तथापि श्री प्रकाश उनके आदेशों का लगातार उल्लंघन और इस प्रकार उनकी मानहानि करते हुए आज तक तमाम कान्त्रक्ट्स को तेर्मिनेट नही है, जिससे फालतू खर्च हो रहा है, जो की राष्ट्रीय क्षति है।बताते है की इस मुद्दे पर करीब ३ महीने पहले सीआरबी के चेंबर में बुलाई गई एक मीटिंग में श्री विज श्री प्रकाश के बीच काफ़ी गर्मागर्मी हो गई थी। इस meeting में कोंकण रेलवे के एक director भी मौजूद थे। सूत्रों का कहना है की उसी के बाद श्री प्रकाश ने यह पत्र लिखकर एम्ई श्री विज सहित पूर्व ऐएम्/सिविल इंजीनियरिंग श्री राकेश चोपडा (वर्त्तमान जीएम/ दक्षिण रेलवे) को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है, जबकि बोर्ड के कुछ ऑपरेटिंग अधिकारीयों का मानना है की चूँकि स्टील एवम सीमेंट के भाव काफ़ी बढ़ गए है। इसलिए ऐलाइनमेंट बदल देने से यहाँ कार्यरत सभी कान्त्रक्टर सस्ते में छुट जाएंगे। इसलिए यह सारा खेल हो रहा है। अब देखते है की उठ किस करवट बैठता है।

मुंबई के हिन्दीभाषियों के साथ लालू की धोकाधडी, राजनीति की नई चाल

कोलकत्ता की राह पर मुंबई
करीब २५० राज्य सड़क परिवाहन की बसे, लगभग ३७५ टैक्सियाँ, करीब १२५ बेस्ट की बसे और सैकडो ऑटो रिक्शा, ट्रक एवं निजी वाहनों को फूँक डाला गया। यह निजी और सार्वजनिक संपत्ति के नुक्सान के आंकड़े महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के मराठी मानूस बनाम उत्तर भारतीय विवाद का परिणाम हैं। मनसे प्रमुख राज ठाकरे अपनी राजनितिक जड़े जमाने के लिए और अपनी पैतृक पार्टी शिवसेना की जड़े काटने एवं उसका वोट बैंक हथियाने के लिए कभी जया बच्चन विवाद, कभी रेलवे परीक्षार्थियों को पीटकर भूमिपुत्रों के हक की बात और कभी जेट एयरवेज के कर्मचारियों को नौकरी से न निकले जाने की धमकी, कभी मराठी माणूस बनाम उत्तर प्रदेशीय, कभी मराठी माणूस बनाम बिहारी आदि विवादास्पद मामले उठाकर मुंबई को कोलकाता और महाराष्ट्र को पश्चिम बंगाल बनने की राह पर लेजा रहे हैं, जबकि राज्य एवम केन्द्र सरकार उनकी इन असम्वय्धानिक harakaton को उतनी ही तल्खी से नही ले रही है, जितनी तल्खी से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री आर. आर. पाटिल ने बिहारी युवक राहुल राज की 'पुलिसिया हत्या' पर बजाय निंदा करने के उसका परम पक्षधर बनकर अपनी अमानवीय तल्ख़ टिपण्णी व्यक्त की है। इस सब पर राज ठाकरे को 'मेंटल केस' बताकर लालू यादव जैसे उथले किस्म के सिर्फ़ स्वहित साधन और सिर्फ़ 'अपना कुटुंबहित' देखने वाले नेता इस आग में अपनी उथली टिप्पणियों का घी डालकर और हवा दे रहे है। शासन-प्रशासन और राजनीतिज्ञों की इन तमाम नालायाकियों से तंग आ चुके इस देश के आम आदमी का आक्रोश बिहार में नवयुवकों ने रेलवे एवं अन्य सार्वजनिक संपत्ति को फूँक कर व्यक्त किया हैं। यदि देश के आम आदमी को समान विकास, समान न्याय, समान शिक्षा, समान रोजगार की स्थितियां और समान जीवन यापन के अवसर उपलब्ध कराये गए होते तो शायद आज भाषावाद और प्रांतवाद का विवाद पैदा ही नही होता था। तब शायद अपने ही देश के अन्दर लोग 'बाहरी' नही होते, क्योंकि उन्हें अपने पैतृक निवास और राज्य में ही अनुकूल जीवन-यापन की स्थितियां मिल जाती।उत्तर प्रदेश और बिहार वह बड़े राज्य हैं, जिन्होंने आज़ादी के बाद सबसे ज्यादा समय तक केन्द्र पर राज्य किया परन्तु इन दोनों राज्यों के लालू और मायावती जैसे छिछले किस्म के राजनीतिज्ञों ने कभ अपने गृह प्रदेशों को सिर्फ़ अपने स्वहित और अपने राजनितिक महत्वाकांक्षाओं के चलते तमाम उद्योग-धंधे से लैस करने और उनके विकास की ओर कभी ध्यान नही दिया। इसका परिणाम सामने है की आज इन्ही दो प्रदेशों के डर-बदर हुए लोग देश के दक्षिण-पश्चिम और पूर्वोत्तर राज्यों में पलायित होकर वह के लोगों में सबसे ज्यादा हेयदृष्टी का शिकार हो रहे है। देश के चौतरफा इन दोनों राज्यों के लोगो को ग्र्हुना की दृष्टी से देखा जाने लगा है। यह अत्यन्त शर्म की बात है की यह लोग वह जाकर वहाँ के विकास में अपना योगदान दिए हैं और वहाँ के उद्योग-धंधों को सस्ता श्रम मुहैया कराया है, जिसके बदले उन्हें सिर्फ़ दो जून की रोटी मिली है। परन्तु शायद इसी कारण से wahaan के स्थानीय लोग काहिल और लापरवाह भी हुए है और इसी काहिली के चलते उन्होंने उत्तर प्रदेशीय एवम बिहारियों की तरह स्वयं को शिक्षित और योग्य बनने की तरफ़ ध्यान नही दिया, परिणामस्वरूप जब वह उनसे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने लगे तो उनके अन्दर अपने अधिकार का अंहकार जाग रहा है। परन्तु इस कथित अधिकार के मद में चूर वह फिर भी अपने आपको शिक्षित एवं योग्य बनने की बात भूल रहे हैं। इसी सोच के चलते वह मुंबई को कोलकत्ता और महाराष्ट्र को पश्चिम बंगाल के उद्योगविहीन रास्ते पर दाल रहे है। जिस प्रकार कभी कोलकत्ता इस देश की राष्ट्रीय और आर्थिक राजधानी होते हुए समस्त प्रकार की आर्थिक सामाजिक, राजनितिक गतिविधियों का केन्द्र था, उसी प्रकार आज मुंबई ही। भले ही देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली है और प्रमुख राजनितिक गतिविधियाँ दिल्ली से संचालित होती है, मगर मुंबई आज इस देश की आर्थिक राजधानी है और देश की समस्त आर्थिक गतिविधियों की नब्ज़ न सिर्फ़ अंतर्देशीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्थर पर यही से परिलक्षित होती है। परन्तु इस प्रकार के सार्वजनिक वैमनस्यता फैलाने वाले तथाकथित भूमिपुत्र के आन्दोलनों से जिस प्रकार एक दिन कोलकत्ता से यह दर्जा छीन गया था, उसी प्रकार आने वाले दिनों में मुंबई का भी छीन सकता है। पहले भी कोई उद्योगपति पश्चिम बंगाल में अपना कोई उद्योग लगाने से कतराता था और वामपंथियों के ३० साल पहले राज्य शासन पर काबिज होने के बाद धीरे-धीरे वहाँ के उद्योग-धंधे पलायन कर गए थे। हाल ही के 'नैनो' विवाद के बाद अब शायद ही कोई उद्योगपति पश्चिम बंगाल का का रुख करेगा। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्थर पर देश और राज्य की जो छवि ख़राब हुई, सो अलग। कामोबेस यही स्थितियां मुंबई और महाराष्ट्र की बनती जा रही हैं. यदि इन पर मुंबई और महाराष्ट्र के प्रबुद्ध वर्ग, बुद्धिजीवी और राजनीतिज्ञों ने अवलिम्ब ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में वह भी पश्चिम बंगाल की तरह हर गली-कूचे में अपनी-अपनी शाखा खोलकर सामजिक आतंकवाद को चला रहे होंगे।

सोमवार, 3 नवंबर 2008

हिन्दी कप्यूट्रिग फाउण्डेशन बहाल

हिन्दी कप्यूट्रिग फाउण्डेशन को भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने भंग करने के आदेश जून २००६ मेंदिए थे, जिसपर संसदीय राजभाषा समिति ने अपना विरोध दर्ज कराया और बार बार रेल के अधिकारियों के पास जाकर तथा इसकी उपयोगिता बताई ।रेल बोर्ड के अध्यक्ष का मोखिक साक्ष्य भी लिया जिसमें जाकर उन्होने इसे जारी रखने का आश्वासन दिया ।
अब रेलवे ने ३० सितम्बर को इसे बहाल कर दिया है और इसकी गतिविधियां पश्चिम रेल के प्रधान कार्यालय पर पूर्व की तरह जारी रखी जा सकेगी ।
ज्ञात्वय है कि हर्ष कुमार नामक अधिकारी जो कि हिनदी का विरोधी है, और हिनदी के नाम पर अब तक अनेकानेक घपले कर चुका है, ने एक चोर उपनिदेशक मोटवानी से मिलकर इसे भंग कराने का प्रयास किया । श्री लालू प्रसाद रेल मंत्री के इलाके में भी इसका विरोध हुआ ।
खुद हिनदी वाले जो बोर्ड में बैठकर हिनदी के नाम पर गलत कार्य करते है, उन्हे ऐसे जनविरोधी कार्य करने से परहेज करना चाहिये ।

रविवार, 5 अक्टूबर 2008

मुंबई में २२ भारतीय भाषाओँ का सम्मलेन

अक्टूबर की ३ तारीख से ५ तारीख तक महारास्त्र राज्य हिन्दी साहित्य अकेडमी ने एस अद्भुत प्रकार का सर्व भारतीय भाषा सम्मलेन का आयोजन किया जो की मिल का पत्थ् र के रूप में स्थ्ापित हो गया है । इस सम्मलेन में प्रमुख् रूप से यह tतथ्य सामने आया की इण्टरनेट पर सभी भारतीय भाषाओँ के पृष्ठ बहुत ही कम है और अगर स्थिति यही रही ताो एक दिन इन भाषाओँ का वजूद अपने आप समाप्त हो जाने का ख् तरा हो जाएगा । इस सम्मलेन काो संबाोधन करते हुए डाॉ। राजेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा की अभी भी समय है की हम सब मिलकर स्वयं सेवी संगठनाों की सहायता से इस काम को आगे ले बढाएं । श्री नंद किश्ेर नाोटियाल जी, जो की इस अकेडमी के कार्याध्यक्षा है, उन्हाोने बड़े मन से इस सम्मलेन को सफल बनने में अपना पूरा याोगदान दिया तीन दिन के सभ्ी कार्यक्रम बहुत सराहनीय रहे

शनिवार, 7 जून 2008

हिन्दी की दुर्दशा का आलम

हिन्दी की दुर्दशा का आलम यह है कि भारत कि संसद को भी इसकी परवाह नही है संसद कि एक समिति सरकारी दफ्तरों मे हिन्दी का निरीक्षण भी करती है लकिन कोई फ़ायदा नहीं होता। हिन्दी अधिकारी नाम का प्राणी सब झूठे आंकरे डे देता है और समिति उसपर विश्वास करती है। आज रेलवे मे सभी कम्पूटर सिस्टम केवल अंग्रेजी मे काम कर राहे है । रेलवे के बडे अफसर हिंदी वालों पर हँसते है और उनकी मजाक बनाते है क्योंकि उन्हें कम्पूटर नही आता। हर्ष कुमार नाम का अफसर तो अपने आप को बहुत बडा मानता है उसने Hindi Computing Foundation को भी खत्म करने कि साजिश रच ली है जिसका सीधा नुकसान लालू को अगले चुनाव मे होगा जहाँ बिहार के लोग उनसे पूछ लेंगे कि हिन्दी वालो को नोकरी केसे मिलेगी जब हिन्दी ही खत्म हो जायगी

मंगलवार, 3 जून 2008

Hindi as World Language

हिन्दी आज विश्व की भाषा बन रही है mumbai men दिनांक अक्टूबर से अक्टूबर तक सर्व भाषा सम्मालन का आयोजन किया जा रहा है अधिक जानकारी के लिया कृपया भाषासम्मेलन@जीमेल.कॉम पर सम्पर्क करें
राजेंद्र गुप्ता