उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के भाजनता पार्टी छोड़ने और समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाने के बाद अब आरएसएस प्रमुख सुदर्शन ने बाबरी मस्जिद गिराने की घटना पर यह कहते हुए सबको चौंका दिया है कि विवादित ढांचा कारसेवकों ने नहीं बल्कि खुद तत्कालीन राज्य सरकार ने गिराया था।
आरएसएस प्रमुख के.एस. सुदर्शन ने शनिवार को यहां स्टेडियम ग्राउंड पर ' प्रकट समारोह ' को संबोधित करते हुए कहा कि ' दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा कारसेवकों ने नहीं बल्कि सरकार ने गिराया था। मैं उस समय वहां मौजूद था। हम लोग वहां एक गैर विवादित स्थान पर निर्माण कार्य करना चाहते थे, लेकिन पीछे से अचानक कुछ सरकारी लोग आए और उन्होंने ढांचा गिरा दिया। '
यहां से लगभग तीन किलोमीटर दूर दुपाड़ा मार्ग स्थित जैन फार्म हाउस पर आरएसएस के मध्य भारत प्रांत के रविवार से शुरू हुए तीन दिवसीय कार्यकर्ता शिविर में शामिल होने आए सुदर्शन ने अंग्रेजी भाषा पर प्रहार करते हुए कहा कि हम भारतीय अपने दिमाग से अंग्रेजों और अंग्रेजी को नहीं निकाल पा रहे हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था पर अंग्रेजी हावी हो गई है।
शनिवार, 7 फ़रवरी 2009
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2009
हिन्दी ई-मेल पर कार्यशाला,
हिन्दी ई-मेल पर कार्यशाला
भारतीय सोफ्ट्वेअर प्रौद्योगिकी पार्क – मुंबई में आज दिनांक 7 फरवरी 09 को एक हिन्दी कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें ई-मेल पर हिन्दी के प्रयोग को सिखाचा गया । इस कार्यशाला का उद्घाटन प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती राजश्री शिन्दे ने किया और इस कार्यशाला में व्याख्यान डॉ। राजेन्द्र गुप्ता ने दिया ।इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रमुख रूप से इस कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी थे । इस कार्यशाला की समीक्षा सुश्री भावना मीणा ने की तथा सभी कर्मचारियों ने आश्वासन दिया कि वे इस तकनीक का प्रयोग अवश्य करेंगे । इस कार्यशाला के आयोजन में श्री रवि पाटिल का विशेष योगदान रहा ।
भारतीय सोफ्ट्वेअर प्रौद्योगिकी पार्क – मुंबई में आज दिनांक 7 फरवरी 09 को एक हिन्दी कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें ई-मेल पर हिन्दी के प्रयोग को सिखाचा गया । इस कार्यशाला का उद्घाटन प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती राजश्री शिन्दे ने किया और इस कार्यशाला में व्याख्यान डॉ। राजेन्द्र गुप्ता ने दिया ।इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रमुख रूप से इस कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी थे । इस कार्यशाला की समीक्षा सुश्री भावना मीणा ने की तथा सभी कर्मचारियों ने आश्वासन दिया कि वे इस तकनीक का प्रयोग अवश्य करेंगे । इस कार्यशाला के आयोजन में श्री रवि पाटिल का विशेष योगदान रहा ।
गुरुवार, 5 फ़रवरी 2009
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति नवी मुंबई द्वारा वैज्ञानिक विषय पर संगोष्ठी आयोजित
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति नवी मुंबई द्वारा वैज्ञानिक विषय पर संगोष्ठी आयोजित
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति नवी मुंबई द्वारा वैज्ञानिक विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई , यह गोष्ठी दिनांक 5 फरवरी 2009 को बेलापुर स्थित पजाब नेशनल बैंक के आडिटोरियम में आयोजित हुई । इस संगोष्ठी में राजभाषा विभाग के उपनिदेशक डॉ. मोती लाल गुप्ता सहित भारतीय भूचुम्बकत्तव संस्थान की निदेशक प्रो भट्टाचार्य तथा उनके साथियों ने वैज्ञानिक विषयों पर प्रकाश डाला । इस प्रकार की संगोष्ठी आयोजित होने से यह बात साफ हो जाती है कि वैज्ञानिक विषय भी भारतीय भाषाओं में अच्छी तरह बताए जा सकते है । कॉटन कार्पोरेशन आफ इंडिया की महाप्रबंधक राजभाषा डॉ. रीता कुमार इस संगोष्ठी के आयोजन को सफल बनाने में कामयाब रही ।
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति नवी मुंबई द्वारा वैज्ञानिक विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई , यह गोष्ठी दिनांक 5 फरवरी 2009 को बेलापुर स्थित पजाब नेशनल बैंक के आडिटोरियम में आयोजित हुई । इस संगोष्ठी में राजभाषा विभाग के उपनिदेशक डॉ. मोती लाल गुप्ता सहित भारतीय भूचुम्बकत्तव संस्थान की निदेशक प्रो भट्टाचार्य तथा उनके साथियों ने वैज्ञानिक विषयों पर प्रकाश डाला । इस प्रकार की संगोष्ठी आयोजित होने से यह बात साफ हो जाती है कि वैज्ञानिक विषय भी भारतीय भाषाओं में अच्छी तरह बताए जा सकते है । कॉटन कार्पोरेशन आफ इंडिया की महाप्रबंधक राजभाषा डॉ. रीता कुमार इस संगोष्ठी के आयोजन को सफल बनाने में कामयाब रही ।
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशनलि। चर्चगेट मुंबई में हिन्दी ई-मेल पर कार्यशाला सम्पन्नहुई
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशनलि। चर्चगेट मुंबई में हिन्दी ई-मेल पर कार्यशाला सम्पन्नहुई
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशनलि चर्चगेट मुंबई में हिन्दी ई-मेल पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, यह कार्यशाला दिनांक ३ फरवरी २००९ को चर्चगेट स्थ्ति सभा कक्ष में आयोजित की गई, इस कार्यशाला में मुंबई के सभी सरकारी कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारियों ने भाग लिया । ज्ञात है कि राजभाषा के रूप में हिन्दी के विकास में बदलती हुई विकास की दौड में हिन्दी का काम कंप्यूटर पर कम हो रहा है । इसी को ध्यान में रखकर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति सरकारी कार्यालयों के तत्वावधान में यह कार्यशाला प्रातः ११ बजे से सांय तक चली । इस कार्यशाला का उद्घटन डॉ पी सी सहगल, प्रबंध निदेशक एम आर वी सी ने किया । यह उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार के आयोजनों से राजभाषा के रूप में हिन्दी का विकास अधिक से अधिक होगा ।इस कार्यशाला में मुख्य रूप से ई-मेल पर व्याख्यान श्री राजीव शर्मा, मुख्य संकेत व दूरसंचार इंजीनियर एम आर वी सी का हुआ और श्री प्रभात सहाय, मुख्य राजभाषा अधिकारी के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित होगी । पश्चिम रेलवे के उपमहाप्रबंधक (राजभाषा ) श्री के पी सत्यनंदन ने प्रबंध निदेशक श्री सहगल का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया kएमआर वी सी के उपमहाप्रबंधक (राजभाषा) डॉ राजेन्द्र गुप्ता तथा श्री बी के शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने में हर संभव सहयोग दिया , उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अन्य कार्यालयों में भी निरंतर चलाई जाती रहेंगी ।
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशनलि चर्चगेट मुंबई में हिन्दी ई-मेल पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, यह कार्यशाला दिनांक ३ फरवरी २००९ को चर्चगेट स्थ्ति सभा कक्ष में आयोजित की गई, इस कार्यशाला में मुंबई के सभी सरकारी कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारियों ने भाग लिया । ज्ञात है कि राजभाषा के रूप में हिन्दी के विकास में बदलती हुई विकास की दौड में हिन्दी का काम कंप्यूटर पर कम हो रहा है । इसी को ध्यान में रखकर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति सरकारी कार्यालयों के तत्वावधान में यह कार्यशाला प्रातः ११ बजे से सांय तक चली । इस कार्यशाला का उद्घटन डॉ पी सी सहगल, प्रबंध निदेशक एम आर वी सी ने किया । यह उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार के आयोजनों से राजभाषा के रूप में हिन्दी का विकास अधिक से अधिक होगा ।इस कार्यशाला में मुख्य रूप से ई-मेल पर व्याख्यान श्री राजीव शर्मा, मुख्य संकेत व दूरसंचार इंजीनियर एम आर वी सी का हुआ और श्री प्रभात सहाय, मुख्य राजभाषा अधिकारी के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित होगी । पश्चिम रेलवे के उपमहाप्रबंधक (राजभाषा ) श्री के पी सत्यनंदन ने प्रबंध निदेशक श्री सहगल का स्वागत पुष्पगुच्छ देकर किया kएमआर वी सी के उपमहाप्रबंधक (राजभाषा) डॉ राजेन्द्र गुप्ता तथा श्री बी के शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने में हर संभव सहयोग दिया , उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अन्य कार्यालयों में भी निरंतर चलाई जाती रहेंगी ।
रविवार, 1 फ़रवरी 2009
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशनलि। चर्चगेट मुंबई में हिन्दी ई-मेल पर कार्यशाला
मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशनलि। चर्चगेट मुंबई में हिन्दी ई-मेल पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है यह कार्यशाला दिनांक ३ फरवरी २००९ को चर्चगेट स्थ्ति सभा कक्ष में आयोजित की जाएगी, इस कार्यशाला में मुंबई के सभी सरकारी कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे है । ज्ञात है कि राजभाषा के रूप में हिन्दी के विकास में बदलती हुई विकास की दौड में हिन्दी का काम कंप्यूटर पर कम हो रहा है । इसी को ध्यान में रखकर इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति सरकारी कार्यालयों के तत्वावधान में यह कार्यशाला प्रातः ११ बजे से सांय तक चलेगी ।
इस कार्यशाला का उद्घटन डॉ। पी सी सहगल, प्रबंध निदेशक एम आर वी सी करेंगे
उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार के आयोजनों से राजभाषा के रूप में हिन्दी का विकास अधिक से अधिक होगा ।
इस कार्यशाला में मुख्य रूप से ई-मेल पर व्याख्यान श्री राजीव शर्मा, मुख्य संकेत व दूरसंचार इंजीनियर एम आर वी सी का होगा और श्री प्रभात सहाय, मुख्य राजभाषा अधिकारी के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित होगी ।
उपमहाप्रबंधक (राजभाषा) डॉ राजेन्द्र गुप्ता इस कार्यशाला केलिए प्रयत्नशील हैं ।
इस कार्यशाला का उद्घटन डॉ। पी सी सहगल, प्रबंध निदेशक एम आर वी सी करेंगे
उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार के आयोजनों से राजभाषा के रूप में हिन्दी का विकास अधिक से अधिक होगा ।
इस कार्यशाला में मुख्य रूप से ई-मेल पर व्याख्यान श्री राजीव शर्मा, मुख्य संकेत व दूरसंचार इंजीनियर एम आर वी सी का होगा और श्री प्रभात सहाय, मुख्य राजभाषा अधिकारी के मार्गदर्शन में यह कार्यशाला आयोजित होगी ।
उपमहाप्रबंधक (राजभाषा) डॉ राजेन्द्र गुप्ता इस कार्यशाला केलिए प्रयत्नशील हैं ।
गुरुवार, 22 जनवरी 2009
जो चमचागिरी नहीं करे, तो भरे डिमोशन और स्थानान्तरण
जो चमचागिरी नहीं करे, तो भरे डिमोशन और स्थानान्तरण
रेलवे विभाग के राजभाषा विभाग में अब काम के बजाय चमचागिरी हावी हो गई है, जो साहेब की चमचागिरी नही करता वह अनेकानेक यातनाएं सहन करता है, यही हुआ अब तक और आज भी हो रहा है । हम बार बार कह रहे है कि रेलवे बोर्ड या किसी भी रेल में अधिकारियों को हिन्दी से कोई लेना देना नहीं है यहा तो बोर्ड में राजभाषा निदेशालय में बैठा उपनिदेशक जो कर दे वही फाइनल हो जाता है और वहां पर बैठा है सिंधी, कहते है कि यह कौम ही इस प्रकार की है कि इनसे खतरनाक तो सांप भी नहीं होता, एक बार सांप का काटा बच सकता है सिंधी का काटा नहीं बच सकता । यही किया है हाल में वरिष्ट राजभाषा अधिकारियों की तैनाती में , उसने जो कर दिया उस पर सभी ने अपनी मोहर लगा दी, और बेचारी परेशान हुए है पश्चिम रेल के और इलाहाबाद में नियुक्त राजभाषा अधिकारी ।
ध्यान देने लायक जो तथ्य है उनपर गौर ही नहीं किया गया जैसे कि ः
१ सभी रेलों पर एक एक अधिकारी समान अनुपात से दिया जाना चाहिये था
२ उक्त रेलों पर नियमानुसार ५० प्रतिशत ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित तैनात किये जाने चाहिये थे परन्तु यह भी नहीं किया गया ।
३ पश्चिम रेल पर पांच मण्डल है और पांच ही राजभाषा अधिकारी , यदि उक्त तीन अधिकारी आ जाएंगे तो पहले से ही कार्यरत नियमित रूप में चयनित अधिकारी कहां जाएंगे, यह सोचना बोर्ड का काम है ।
४ उत्तर रेल और मध्य रेल में एक भी सीधी भर्गी वाला अधिकारी क्यों नहीं दिया गया, इन रेलों पर क्या मेहरबानी है ।
५ यह ठीक है कि तदर्थ अधिकारियों को पदोन्नत किया जा सकता है लेकिन पदोन्नत होने के बाद वे कहां जाएंगे, क्योंकि उनकी रिक्ती तो नियमित चयन करके भर दी गई है और नियमित चयनित अधिकारियों को पदावनत नहीं किया जा सकता ।
६ इसी प्रकार इलाहाबाद में दो सीधी तैनाती कर दी गई है और वहां पर कार्यरत अधिकारियों केलिए परेशानी खडी की गई है ।
७ यदि सबसे जूनियर को ही पदोन्नति करनी है तो महाप्रबंधक को तदर्थ राजभाषा अधिकारी भरने की पावन बोर्ड ने क्यों नहीं दी ।
८ मोटवानी ने पहले भी हिन्दी कंपटिंग फाउण्डेशन के मामले में अडंगा लगाया था जो कि संसदीय राजभाषा समिति के हस्तक्षेप के कारण ठीक हुआ है , अतः जब बोर्ड जानता है कि यह व्यक्ति गलत है और गलत कार्य कराता है तो उसे रेल क्लेम ट्रीबुनल में क्यों नहीं भेजा जाता ।
९ बोर्ड को पहले भी एक प्रस्ताव भेजा गया था कि निमार्ण विभाग में जिस प्रकार सब विभागों केलिए पद सृजन हेतु एक प्रतिशत निर्धारित कर दिया है उसमें हिनदी केलिए भी कुछ प्रतिशत होना चाहिये, लेकिन ऐसे प्रस्तावों पर बोर्ड विचार ही नहीं करता क्योंकि इनसे रेलों पर नियुक्त कर्मचारियों का भला होता है ।
अब देखते है कि इन रेलों के महाप्रबंधक अपने अधिकारियों को बचाने केलिए क्या करते है, उन्हे करना भी चाहिये और यह फर्ज भी है । जब तक पहले से नियुक्त नियमित अधिकारियों कोपूरा काम नहीं मिलता , हमारा मानना है कि तब तक सीधी भर्ती वालों को ज्वाइन नहीं करने देना चाहिये,
रेलवे विभाग के राजभाषा विभाग में अब काम के बजाय चमचागिरी हावी हो गई है, जो साहेब की चमचागिरी नही करता वह अनेकानेक यातनाएं सहन करता है, यही हुआ अब तक और आज भी हो रहा है । हम बार बार कह रहे है कि रेलवे बोर्ड या किसी भी रेल में अधिकारियों को हिन्दी से कोई लेना देना नहीं है यहा तो बोर्ड में राजभाषा निदेशालय में बैठा उपनिदेशक जो कर दे वही फाइनल हो जाता है और वहां पर बैठा है सिंधी, कहते है कि यह कौम ही इस प्रकार की है कि इनसे खतरनाक तो सांप भी नहीं होता, एक बार सांप का काटा बच सकता है सिंधी का काटा नहीं बच सकता । यही किया है हाल में वरिष्ट राजभाषा अधिकारियों की तैनाती में , उसने जो कर दिया उस पर सभी ने अपनी मोहर लगा दी, और बेचारी परेशान हुए है पश्चिम रेल के और इलाहाबाद में नियुक्त राजभाषा अधिकारी ।
ध्यान देने लायक जो तथ्य है उनपर गौर ही नहीं किया गया जैसे कि ः
१ सभी रेलों पर एक एक अधिकारी समान अनुपात से दिया जाना चाहिये था
२ उक्त रेलों पर नियमानुसार ५० प्रतिशत ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित तैनात किये जाने चाहिये थे परन्तु यह भी नहीं किया गया ।
३ पश्चिम रेल पर पांच मण्डल है और पांच ही राजभाषा अधिकारी , यदि उक्त तीन अधिकारी आ जाएंगे तो पहले से ही कार्यरत नियमित रूप में चयनित अधिकारी कहां जाएंगे, यह सोचना बोर्ड का काम है ।
४ उत्तर रेल और मध्य रेल में एक भी सीधी भर्गी वाला अधिकारी क्यों नहीं दिया गया, इन रेलों पर क्या मेहरबानी है ।
५ यह ठीक है कि तदर्थ अधिकारियों को पदोन्नत किया जा सकता है लेकिन पदोन्नत होने के बाद वे कहां जाएंगे, क्योंकि उनकी रिक्ती तो नियमित चयन करके भर दी गई है और नियमित चयनित अधिकारियों को पदावनत नहीं किया जा सकता ।
६ इसी प्रकार इलाहाबाद में दो सीधी तैनाती कर दी गई है और वहां पर कार्यरत अधिकारियों केलिए परेशानी खडी की गई है ।
७ यदि सबसे जूनियर को ही पदोन्नति करनी है तो महाप्रबंधक को तदर्थ राजभाषा अधिकारी भरने की पावन बोर्ड ने क्यों नहीं दी ।
८ मोटवानी ने पहले भी हिन्दी कंपटिंग फाउण्डेशन के मामले में अडंगा लगाया था जो कि संसदीय राजभाषा समिति के हस्तक्षेप के कारण ठीक हुआ है , अतः जब बोर्ड जानता है कि यह व्यक्ति गलत है और गलत कार्य कराता है तो उसे रेल क्लेम ट्रीबुनल में क्यों नहीं भेजा जाता ।
९ बोर्ड को पहले भी एक प्रस्ताव भेजा गया था कि निमार्ण विभाग में जिस प्रकार सब विभागों केलिए पद सृजन हेतु एक प्रतिशत निर्धारित कर दिया है उसमें हिनदी केलिए भी कुछ प्रतिशत होना चाहिये, लेकिन ऐसे प्रस्तावों पर बोर्ड विचार ही नहीं करता क्योंकि इनसे रेलों पर नियुक्त कर्मचारियों का भला होता है ।
अब देखते है कि इन रेलों के महाप्रबंधक अपने अधिकारियों को बचाने केलिए क्या करते है, उन्हे करना भी चाहिये और यह फर्ज भी है । जब तक पहले से नियुक्त नियमित अधिकारियों कोपूरा काम नहीं मिलता , हमारा मानना है कि तब तक सीधी भर्ती वालों को ज्वाइन नहीं करने देना चाहिये,
सोमवार, 19 जनवरी 2009
सलाहकार समितियों में केवल उन्ही को नामित करना होगा जो वास्तव में इस कार्य को बढाने में सरकार की मदद कर सकते हैं
राजभाषा के रूप में हिन्दी का सपना कब पूरा होगा, यह असाघ्य रोग हो गया है, हम बार बार इस बात की ओर इशारा कर रहे है कि जिनके कधे पर इसकी जिम्मेवारी दी गई है वे इस जिममेवारी को यदि पूरा नहीं कर पाते तो उन्हे पद से हटा दिया जाना चाहिये । यहां हमारा मकसद उन्हे नौकरी से निकालने का नहीं है, वरन् उनकी जगह काबिल कर्मियों को लाने का है । लेकिन जब इसपर भी राजनीति हो तो कोई कुछ नहीं कह सकता । आज सभी जानते है कि जमाना कंप्यूटर का है ओर इस जमाने में यदि हिन्दी को साथ साथ लेकर नहीं चला गया तो वह दिन दूर नहीं , जब सरकारी कार्यालय से हिन्दी नाम समाप्त हो जाएगा ।
मैं रेलवे विभाग के बारे में कुछ कहना अपना फर्ज समझता हू जहां हिन्दी के नाम पर काफी कुछ हो रहा है, लेकिन हिन्दी कहीं भी दिखाई नहीं देती, आज की तारीख में रेलवे के सभी कंप्यूटर सिस्टम केवल इग्रेजी में काम कर रहे है यहां तक कि उनमें हिनदी में काम करने की सहूलियत भी नहीं है । इसका दोषी कोन है, इसपर विचार करने की जरूरत है । रेलवे में प्रयुक्त फायस, एफ एम आय एस, अफ्रेश, स्टोर सिस्टम, पी एम आय एस, आदि सभी केवल अंग्रेजी में ही काम करने के लायक है, हिन्दी उन्हे रास नहीं आती । इसपर संसदीय राजभाषा समिति ने कई बार प्रश्न उठाया, लेकिन वही ढाक के तीन पात, स्थिति वहीं की वहीं है । जरा सी भी नहीं बदली । अतः राजभाषा कानून कहां गया, और इसकी क्या महत्तता है यह भी विचार होना चाहिये, रेलवे की हिन्दी सलाहकार समिति में राजभाषा विभाग जिन्हे प्रतिनिधि के तौर पर भेजता है, वे सभी कैसे है, यह सब जानते है , वे केवल मजा करने केलिए सदस्य बनते है मत्री तक अपनी ताकत रखते है लेकिल केवल अपनेलिए, हिन्दी से उनका कोई लेना देना नहीं होता । प्रश्न यह भी उठता है तो इस प्रकार से देख को धोका देने केलिए ऐसे विभाग की आवश्यकता क्या है , अतः ऐसे विभाग को तुरन्त बन्द कर देना चाहिये ।
लेकिन ऐसा करना भी उचित नहीं है, सवाल यह भारतीय संस्कृति का है और इसे बचाने केलिए यह विभाग बनाया गया है ताकि भारतीय भाषाओं का संवर्धन हो सके, अतः इस विभाग को अब मूक दृष्टा न होकर गंभीर रूप से सोचना होगा और सलाहकार समितियों में केवल उन्ही को नामित करना होगा जो वास्तव में इस कार्य को बढाने में सरकार की मदद कर सकते हैं ।
मैं रेलवे विभाग के बारे में कुछ कहना अपना फर्ज समझता हू जहां हिन्दी के नाम पर काफी कुछ हो रहा है, लेकिन हिन्दी कहीं भी दिखाई नहीं देती, आज की तारीख में रेलवे के सभी कंप्यूटर सिस्टम केवल इग्रेजी में काम कर रहे है यहां तक कि उनमें हिनदी में काम करने की सहूलियत भी नहीं है । इसका दोषी कोन है, इसपर विचार करने की जरूरत है । रेलवे में प्रयुक्त फायस, एफ एम आय एस, अफ्रेश, स्टोर सिस्टम, पी एम आय एस, आदि सभी केवल अंग्रेजी में ही काम करने के लायक है, हिन्दी उन्हे रास नहीं आती । इसपर संसदीय राजभाषा समिति ने कई बार प्रश्न उठाया, लेकिन वही ढाक के तीन पात, स्थिति वहीं की वहीं है । जरा सी भी नहीं बदली । अतः राजभाषा कानून कहां गया, और इसकी क्या महत्तता है यह भी विचार होना चाहिये, रेलवे की हिन्दी सलाहकार समिति में राजभाषा विभाग जिन्हे प्रतिनिधि के तौर पर भेजता है, वे सभी कैसे है, यह सब जानते है , वे केवल मजा करने केलिए सदस्य बनते है मत्री तक अपनी ताकत रखते है लेकिल केवल अपनेलिए, हिन्दी से उनका कोई लेना देना नहीं होता । प्रश्न यह भी उठता है तो इस प्रकार से देख को धोका देने केलिए ऐसे विभाग की आवश्यकता क्या है , अतः ऐसे विभाग को तुरन्त बन्द कर देना चाहिये ।
लेकिन ऐसा करना भी उचित नहीं है, सवाल यह भारतीय संस्कृति का है और इसे बचाने केलिए यह विभाग बनाया गया है ताकि भारतीय भाषाओं का संवर्धन हो सके, अतः इस विभाग को अब मूक दृष्टा न होकर गंभीर रूप से सोचना होगा और सलाहकार समितियों में केवल उन्ही को नामित करना होगा जो वास्तव में इस कार्य को बढाने में सरकार की मदद कर सकते हैं ।
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